चाणक्य के 10 अनमोल विचार बदल देंगे आपकी जिन्दगी को
- ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।
- वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
- शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
- सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता।
- आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है।
- लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
- सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।
- कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।
- विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।
- शत्रु के गुण को भी ग्रहण करना चाहिए।
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